रसपान से रोग उपचार

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रसपान से रोग उपचार

गठियावात: अनन्नास, नीबू, खीरा, गाजर, पालक, चुकंदर का रस उपयोगी है.

मधुमेह: गाजर, संतरा, पालक, मुसम्बी, अन्नानास, नीबू, का रस उपयोगी है.

उच्च रक्तचाप: संतरा, अंगूर, गाजर चुकंदर, खीरा का रस उपयोगी है.

सर्दी-जुकाम: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, प्याज, पालक का रस उपयोगी है.

आँखों के लिए: टमाटर, गाजर, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

मोटापे के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, टमाटर, पपीता, चुकंदर, गाजर, पालक, पत्तागोभी का रस उपयोगी है.

अल्सर के लिए: गाजर, पत्तागोभी, अंगूर, खुबानी का रस उपयोगी है.

टांसिल के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, पालक, मूली, खुबानी का रस उपयोगी है.

सिरदर्द: अंगूर, नीबू, गाजर, पालक का रस उपयोगी है.

अनिद्रा: सेव, गाजर, अंगूर, नीबू कर रस उपयोगी है.

रक्ताल्पता: गाजर, पालक, काले अंगूर, चुकंदर, खुबानी का रस उपयोगी है.

कब्ज: अंगूर, गाजर, चुकंदर, पपीता का रस उपयोगी है.

बुखार: संतरा, नीबू, मुसम्बी, गाजर, अनन्नास, प्याज, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

पीलिया: गन्ना, नीबू, गाजर, अंगूर, चुकंदर, खीर, मुली, पालक, नाशपाती का रस उपयोगी है.

साभार : लोमेश कुमार बच : 9753705914

स्वस्थ व सुखी रहने के लिये रसाहार उतना ही जरूरी है, जितना जरूरी ठोस आहार है। बीमारियों से लडऩे के लिए रस औषधि की तरह उपयोगी है। हमारे आहार का काम है शरीर में होने वाली क्षति एवं पूर्ति में मदद करना। फलों व सब्जियों में जो पोषक तत्व पाए जाते हैं, वह हमें रोगों से मुकाबला करने की शक्ति देता है।

जूस थेरेपी से बहुत सी बीमारियों का मुकाबला किया जा सकता है। जैसे- सर्दी, फ्लू, जुकाम, वायरल फीवर। फल एवं सब्जी दोनों का रस लाभदायक होता है। इस रस में तमाम पौष्टिक तत्व होते हैं। जरूरत पडऩे पर फल एवं सब्जियों का जूस। रस मिलाकर भी ले सकते हैं। जूस थेरेपी में सब्जियों एवं फलों का रस मिलाकर लेने से कोई गलत या साइड इफेक्ट नहीं है। परंतु रस एवं जूस को मिलाते समय सावधानी बरतें कि किसे किसके साथ लेना है।

कमजोरी दूर करे
कोई बीमारी आ जाने पर कमजोरी बढ़ जाती है, जिसमें भोजन आसानी से खाया या पचाया नहीं जा सकता है तो हम जूस या रस थेरेपी को आसानी से उपयोग में ला सकते हैं, जिससे हमारी शारीरिक व मानसिक कमजोरियों को दूर किया जा सकता है। कारण हमें रस एवं जूस से तमाम पौष्टिक तत्व आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में सब्जियों एवं फलों को रस उपयोगी होता है।

आर्गेनिक फूड
जिन खाद्य पदार्थों से रस निकाले जाते हैं, उनकी पैदावार के लिए किसी भी तरह की अधिक खाद की जरूरत नहीं होती है। इस कारण इनकी गिनती आर्गेनिक फूड में होती है। आर्गेनिक फूड होने से इनके रस अधिक पौष्टिक होते हैं।

रस पीने के नियम
जब भी हम कोई चीज पीते हैं हमें धीरे-धीरे मुंह में घुमा-घुमा कर पीना चाहिए। चाहे वह रस हो या जूस यहां तक कि पानी भी धीरे-धीरे ही पीना चाहिए। इस प्रकार पीने से हमारे मुंह में पैदा होने वाली गर्मी शांत हो जाती है तथा ये ठंडक हमारे पेट तक पहुंचती है। ऐसा करने से रक्त अधिक बनने की क्षमता पैदा होती है तथा रक्त संचार भी ठीक से होता है।

गुण-दोष समझें
फल तथा सब्जियां सबके गुण-दोष को समझ लेना चाहिए कि हमें कौन सा फल सूट करता है या कौन सी सब्जी, वही रस या सब्जी लें। ये रस तथा जूस रोगों के निवारण के साथ-साथ रोगों से बचाव कर शरीर को स्वच्छ भी बनाता है। जब तक अधिक आवश्यक न हो फल एवं सब्जियों का रस अलग-अलग ही पिएं।

रसों की आवश्यकता
अति व्यस्तता के कारण हमारे पास सुबह इतना समय नहीं होता कि हम गरिष्ठ ठोस आहार ले सकें कारण, चबा-चबा कर खाने का समय नहीं है। ऐसी स्थिति में रसाहार पोषक ही हमें लेना चाहिए। रसाहार से, फास्ट फूड तथा दूषित भोजन से होने वाले दोष नष्ट हो जाते हैं। अकसर बीमारियां दूषित पानी से होती हैं, जो रस या जूस पीते रहने से पानी की कमी भी पूरी होती है तथा दूषित पानी से होने वाली तमाम बीमारियों से बचा भी जा सकता है। कारण इन रसों में होने वाले पोषक तत्व इन दूषित पानी में होने वाले कीटाणुओं का सफाया करता है।

रस कैसे पिएं
वैसे तो रस को निकालते साथ ही पीना चाहिए ये सच है, मगर आवश्यकता पडऩे पर इन्हें रखना ही पड़े तो 35-38 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान पर रखें, इससे जूस या रस खराब नहीं होने पाता, दूसरे इन्हें कांच की गहरे रंग की बोतल में रखें, जो उबलते पानी से साफ की गई हो। इन सभी चीजों का ध्यान रखते हुए भी रस, जूस तभी निकाल कर रखना चाहिए, जब अति आवश्यक हो वरना रस, जूस तुरंत निकाल कर पिएं।

रस और जूस के गुण
रस पीने से खून साफ होता है। पेशाब अधिक होकर शरीर का टॉक्सिक बाहर निकलता है। रस शरीर के क्षतिग्रस्त कोषों को पुन: निर्माण में सहायक होता है। फल हो या सब्जी इनका रस पीने से पाचन तंत्र पर अधिक जोर नहीं पड़ता और अधिक से अधिक पोषक तत्व की प्राप्ति होती है।

अधिक मात्रा में न लें
इसके बावजूद जूस या रस आवश्यकता से अधिक नहीं लेना चाहिये। कारण ये रस या जूस अधिक अम्लीय होते हैं, जो शरीर की प्राकृतिक अम्लता को बिगाड़ देते हैं।

जूस ग्रीन टॉनिक
आप सात गमलों में गेहूं लगाइए यानी आज एक दिन एक गमले में, दूसरे दिन दूसरे गमले में तीसरे दिन तीसरे में, इस तरह सात दिनों में सात गमले में

गेहूं लग जाएंगे। अब पंद्रह दिन बाद गेहूं की बाली निकलनी शुरू हो जाएगी, जब छह इंच बढ़ जाए तो ऊपर से काट लीजिए। पहले गमले की बाली पहले दिन दूसरे की दूसरे दिन, इस तरह बारी -बारी करें और मिक्सी में थोड़ा सा पानी डालकर चला दीजिए, चाहें तो स्वादानुसार काला नमक डालकर पी लें। शुरू करें आधा कप से, फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ा सकते हैं, परंतु एक कप से ज्यादा नहीं। यह रस या जूस लंबी बीमारी से जूझ चुके लोग जो काफी कमजोर हो जाते हैं, उनके लिए बहुत अच्छा टॉनिक होता है। इसे ही ग्रीन टॉनिक का नाम दिया गया है।

रस पीने का तरीका
जो व्यक्ति पहले से ही स्वस्थ हो, फिर भी स्वस्थ रहे, इसके लिये रोज कम से कम 1-2 गिलास फल या सब्जियों का रस पिएं। अगर किसी बड़ी बीमारी से ग्रस्त है तो रोज हर घंटे दो घंटे पर जूस या रस लेते रहें, यहां तक कि अगर आपको जुकाम हो गया हो तो टमाटर का सूप गरम-गरम पिएंं। जुकाम से होने वाली तमाम परेशानियां दूर होंगी। कई बार कुछ बीमारियों में इन्सान खाना नहीं खा पाता तो उसे रसाहार ही लेना चाहिये। उसमें थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं। रस जूस निकालकर तुरंंत पी लें, ज्यादा लाभदायक रहेगा। फल हो या सब्जी रस जितनी सरलता से पिया जाए, उतना ही अच्छा है। शुरू में फलाहार यानी रस, जूस की मात्रा कम रखें, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं जैसे- तुलसी का रस आधा चम्मच या एक चम्मच गेहूं के पौधे का रस थोड़ी मात्रा में लें। लम्बी बीमारियों में लम्बे समय तक रस व जूस लेना लाभकारी होगा। स्वस्थ लोगों को भी साल भर में 1-2 बार रसाहार पर रहना चाहिये। इससे पाचन संस्था स्वस्थ हो जाती है। मुनक्का, चुकंदर, गाजर, सेब, ककड़ी का जूस बहुत लाभकारी होता है। इन्हें मौसम के हिसाब से पीते रहना चाहिए। जिससे शरीर स्वस्थ व रोगमुक्त रहता है। मोटापा कम होता है। अगर रसाहार पर ही सिर्फ न रह सकें तो अंकुरित अनाज भी साथ लें सकते हैं, जिससे आपकी भूख मिटेगी तथा पौष्टिक तत्व भी मिलेंगे। सब्जियों में स्थित क्लोरोफिल में बहुत उत्तम प्रोटीन पाया जाता है, जिससे प्रोटीन की कमी नहीं होती है।

रसों से चिकित्सा
जूस थेरेपी से बहुत सी बीमारियों को मात दिया जा सकता है। रोगियों को दिए जाने वाले आहार में से रस एक पूरक आहार है, जिससे रोगी को जल्द लाभ मिलता है। खेलकूद, व्यायाम करने वालों को बराबर रस व जूस लेते रहना चाहिए।

तरबूज का रस : ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखता है अत: तरबूज का रस पिएं।
सिरदर्द- सुबह तरबूज का रस निकाल कर उसमें काला नमक डालकर पिएं, इससे सरदर्द ,उल्टी परमानेंट ठीक हो जाता है। किडनी का स्टोन गलाकर बाहर निकालता है। किडनी की कोई प्रॉब्लम नहीं होने पाएगी। गर्मी के बुखार से दूर रखेगा।

करेले का जूस: पीलिया रोग में करेले का जूस सुबह खाली पेट थोड़ा सा रस व बाकी पानी मिलाकर पिएं।

गाजर का रस: मिरगी रोग में गाजर का रस लें।

सेब का रस: गठिया रोग में सेब का रस पिएं। इसमें सोडियम अधिक होता है। आंतों की बीमारी एवं गठिया रोग दूर करता है ।

अनानास का रस: दाद, खाज-खरबूजे तथा अनानास का रस लें। ये शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। इसमें क्लोरिन पाया जाता है। यह थकावट दूर करता है। अनानास में विटामिन ए, बी, सी तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर है। भूख बढ़ाने में मदद करता है। गले की हर परेशानी दूर करता है, टांसिल ठीक करता है, पथरी बनने से रोकता है।

आलू का रस: अम्लता (एसिडिटी) दूर करने के लिए आलू का रस पीना चाहिए।

कैंसर रोग में : कैंसर से बचाव के लिए गेहूं के जवारे, अंगूर, मुनक्का, चुकंदर का रस लेना चाहिए। अदरक का रस सालभर आधा चम्मच एक कप पानी में लें, कभी गले का कैंसर नहीं होगा। कैंसर की रोकथाम के लिए पत्तागोभी, फूलगोभी, लहसुन, प्याज, संतरा, चकोतरा, नींबू का रस अच्छी मात्रा में लें।

संतरा का रस: रोग निरोधक (इम्यून पावर) शक्ति के लिए नारंगी, संतरा का रस लें।

नींबू का रस: आधे सिर में दर्दमाइग्रेन हो तो एक गिलास पानी में नींबू का रस तथा अदरक का रस मिलाकर लें। कम से कम पंद्रह दिन रोज।

मानसिक तनाव- केले में पाये जाने वाला पोटेशियम मानसिक तनाव को कम करता है। केले में विटामिन बी पाया जाता है, जो पथरी निर्माण होने से रोकता है।

ककड़ी का रस: मूत्र रोग में ककड़ी का रस पिएं।

भूख बढ़ाना- नींबू, मौसम्बी, नारंगी, पपीता, इनका रस भूख बढ़ाता है।
खीरे का रस: खीरे का रस पथरी को बाहर निकलने में सहायक है।

बंदगोभी का रस: बंदगोभी में विटामिन ए,बी,सी भरपूर मात्रा में है। ये घाव को जल्दी भरते हैं।

आम का रस: आम रस दूध में मिलाकर पिएं, तमाम बीमारियां दूर करता है। शरीर को तंदुरुस्त बनाता है, रक्तअल्पता को ठीक करता है। आम के रस में विटामिन ए, ई, सी लोह से भरपूर होता है। इसे अधिक नहीं लेना चाहिए। यह शरीर में अधिक गर्मी पैदा करता है, जिससे फोड़े फुन्सी निकलने का डर होता है।

अंगूर का रस: ताजे अंगूर के रस में विटामिन ए,
बी, सी एवं तमाम खनिज लवण मिलता है, कब्ज दूर करता है। मोटापा कम करता है।

अनार का रस : अनार के रस में वसा, आयरन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, फासफोरस, विटामिन बी तथा सी भरपूर मात्रा में रहता है। इसी कारण अनार का रस उत्तम टॉनिक माना जाता है, जो रक्त अल्पता को दूर करता है। गर्भवती महिलाओं को अवश्य लेना चाहिये। ह्रदय रोग से दूर रखता है।

घर में बनाएं रसों से ड्रिंक्स
आजकल बाजार में तमाम तरह के ड्रिंक्स उपलब्ध है, परंतु ये आपके लिए असुरक्षित भी हो सकते हैं। क्योंकि कभी-कभी इनके साइड भी हो सकते हैं। आप घर में ही जूस निकालकर ड्रिंक बनाकर उपयोग कर सकते हैं।

लौकी ड्रिंक्स
एक लौकी लें उसे धोकर छीलकाट लें। अब इसे ब्लंडर या जूसर में डालें। आधा गिलास पानी भी डालें। फिर मिक्सी करके छान लें। अब स्वादानुसार काला नमक, काली मिर्च डालकर पिएं। इसे पीसते समय चार पत्ती तुलसी की भी डालते हैं व तुरंत पी जाएंं। ये जूस आपको डायबिटीज को कम करता है। कब्ज दूर करता है अगर नकसीर फूटते हैं तो लौकी के जूस में थोड़ा सा शहद मिला दिया जाए, ये आपके शरीर को ठंडक देगा। इस जूस को निकालकर फ्रिज में न रखें।

करेला ड्रिंक्स
करेला यूं तो कड़वा होता है, पर यही कड़वाहट फायदेमंद होती है। आप दो या चार करेला लें धोकर, छीलकर टुकड़े-टुकड़े काट लें, अब दो टमाटर धोकर काट लें। एक खीरा धोकर काट लें। सबको आधा गिलास पानी डालकर ग्राइडर में डाल कर चला दें। फिर कपड़े से छान लें, इसमें चुटकी भर काला नमक नींबू का रस डालें व तुरंत पी जाएं। ये ड्रिंक दिल के रोगियों के लिए (ब्लड प्रेशर) वालों के लिए फायदेमद है। ये रक्त को शुद्घ करता है एवं तथा सुचारु रूप से प्रवाह करता है। शारीरिक विकारों को दूर करता है। बीमारियों से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इससे किडनी स्टोन से बचा जा सकता है। मधुमेह के रोगियों के लिए विशेष फायदेमंद है।

खीरा ड्रिंक्स
खीरा धोकर छीले लें, छोटे-छोटे टुकड़े कर लें काट लें, फिर ग्राइंडर में डालें, आधा गिलास पानी डालें, अब इसे छानकर स्वादानुसार काला नमक, नींबू डालें और इसे पी जाएं, रखे नहीं। अगर लगातार इसका सेवन करते रहेंगे तो त्वचा चमकदार होगी। इसका लाभ उठाने के लिए इसे सुबह खाली पेट सेवन करें। इनके कोई साइड इफेक्ट नहीं है। आप इन्हें अपनी सुविधानुसार ले सकते हैं।

तरबूज ड्रिंक
तरबूज खाने के बजाय पिएं। ज्यादा लाभदायक होगा। तरबूज के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। फिर मिक्सी में डालकर देर तक चलाएं फिर छान लें। ड्रिंक्स तैयार है। इसे बैगर चीनी, नमक के पिएं। इस ड्रिंक्स का लगातार उपयोग करने से किडनी स्टोन से दूर रहेंगे। आंतों की सफाई करता है तथा चेहरे पर चमक लाता है।

आंवला ड्रिंक्स
3-4 आंवला लेकर कद्दूकस कर लें या मिक्सी में पीस लें। फिर थोड़ा पानी डालें, तुरंत पी जाएं, ये ड्रिंक्स विटामिन सी का भरपूर स्रोत है। बराबर इसके सेवन से चेहरे पर कांति आती है। झुर्रियां जल्दी नहीं पड़तीं तथा केशों को अधिक उम्र तक काला रखने में मदद करेगा।

चुकंदर ड्रिंक
दो चुकंदर लें छीलकर काट कर टुकड़े करें, मिक्सी में पिसें या फिर कद्दूकस करें। थोड़ा पानी डालकर रस मिला लें। फिर इसे छानकर इसका सेवन करें। इसमें आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है। नियमित सेवन से चेहरे पर लाली आ जाती है। एनीमिक लोग इसे जरूर पिएं बहुत लाभ होगा।
https://sites.google.com/site/hindiarticlesworld/heal/juice-therapy

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About Swami Devaishta

I am a osho sanyasi, yoga teacher and a homoeopath.
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