अपामार्ग / लट्ठजीरा के औषधीय गुण / Medicinal Properties of Achyranthes aspera

Apamarga

 

अपामार्ग 

यह सन्देश डॉ दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद से है…उनका यह कहना है कीमध्यप्रदेश के पातालकोट में आदिवासी अपामार्ग या लट्ठजीरा का औषधीय उपयोग किस प्रकार करते है…अपामार्ग अक्सर खेत खलियानों के आस पास या सड़कों के किनारे देखा जा सकता है, जब हम खेतों या आस पास के उद्यानों में जाते हैं तो अक्सर इसके बीज हमारे शरीर पर कपड़ों पर चिपक जाते हैं और यह जीरे की तरह दिखाई देते हैं…पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार यदि लटजीरे के बीजों को एकत्र करकर मिटटी के बर्तन में भूनकर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग आधा चम्मच इसे खाया जाये तो भूख कम लगती है तथा यह शरीर की वसा को भी कम करता है इस प्रकार यह कम करने में भी मदद करता है इसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं है….इसके तने को साफ़ करकर दातुन की तरह उपयोग करें तो दांतों से जो खून बहने की समस्या होती है वह भी धीरे-धीरे इससे समाप्त हो जाती है….दीपकजी का संपर्क है 9824050784

 This message is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahemdabad…In this message he is telling us about how the Tribal of Patalkot use the Apamarg plant as a medicine….He said Apamarg is a common weed & could be easily found everywhere. Whenever anybody passes nearby this weed its seeds stick with our body and clothes ..It looks like Jeera(Cumin)..According to Tribal knowledge tribes of Patalkot if we collect the seeds of Apamarg and roast them in clay pot and grind well to make powder…This powder can be useful for loosing weight…Deepakji’s at 9824050784

http://swaranetwork.org/swasthya/?cat=125

यह संदेश लोमेश कुमार बच का लिमरू वन औषधालय, जिला कोरबा, छतीसगढ़ से है…इस संदेश में वह अपामार्ग जिसे कई स्थानों पर लट्ठजीरा / चिरचिटा के नाम से भी जाना जाता है के औषधि गुणों के बारे में बता रहे है… इनका कहना है की यह प्रायः सभी स्थानों पर पाया जाता है…यह औषधि अपने दिव्य प्रभावों से शरीर की दूषित धातुओं को शुद्ध करके हमें निरोगी बनाती है…रोग निदान के लिए इसकी पत्तियां, बीज जड़ सभी काम में लायी जाती है इस प्रकार यह सम्पूर्ण पौधा अपने आप में औषधि गुणों को समेटे हुए है… इसकी औषधि देने की मात्रा है पत्र स्वरस 3 ग्राम दिया जाता है, पत्र चूर्ण 3-6 ग्राम की मात्रा में दिया जाता है, मूल चूर्ण को 2-6 ग्राम की मात्रा में और बीज को 3-5 ग्राम की मात्रा में दिया जाता है…. इसके फूलों की मंजरी को तोड़ कर दातों पर मलने से  दांत मजबूत और निरोगी होते है… रक्तार्श जिसे खुनी बवासीर भी कहते है के लिए अपामार्ग के बीजों को पीसकर चावल के धोवन के साथ लेने पर रक्त आना बंद हो जाता है… बधिरता में इसके क्षार को तेल में पकाकर वह तेल कान में डालते रहने पर बधिरता समाप्त हो जाती है… बिच्छु के डंक मारने पर इसकी पत्तियों का रस पिलाने और इसकी जड़ को पीसकर उसका लेप दंश वाले स्थान पर लगाने से आराम मिलता है… भस्मक रोग जिसमे खूब खाने के बाद भी भूख नही मिटती और खाने के इच्छा होती ही रहती है उसके निदान के लिए इसके बीजों को खीर में मिलकर देने से लाभ मिलता है… सेहुआ रोग जिसमे त्वचा में सफ़ेद चकत्ते पड़ जाते है उसके उपचार के लिए इसका पंचांग बनाकर उसके क्षार बनाकर उसे केले के पत्तों का क्षार और हल्दी मिलाकर सेहुआ पर लगाने से अच्छा लाभ होता है…लोमेश्जी का संपर्क है: 9753705914

This is a message of vaidya Lomesh Kumar Buch from Limru forest hospital in Korba, Chhatisgarh. In this message Lomesh ji describes the medicinal use of the wild herb known as “Apamarga” in Hindi (Achyranthes aspera). It is a perennial herb commonly found throughout India & the Indian subcontinent.Lomesh ji says this herb has divine healing powers and it is very useful in expelling toxic contamination from our body. The plant’s leaves, stem, flowers, seeds & root are all equally useful for healing.

Prescribed & recommended quantitative dose of this herb with respect to different parts of the plant:

1. Leaves extract 3 grams.

2. Dry leaves powder 3-6 grams.

3. Dry root powder 2-6 grams.

4. Seeds 3-5 grams.

Uses
Rubbing the spica of this plant on the teeth is very helpful to keep them healthy & strong.
The powder of the plant’s seeds along with water used to wash rice is given to cure piles.
In the case of scorpion bites, the patient gets relief by drinking the extract of the plant’s leaves& by applying the crushed roots of the plant on the bitten area to alleviate venom, as it has anti venom properties.
The seeds of this plant have the property of reducing appetite. The plant’s seeds with condensed milk is used for this purpose.
Apamarga also helps cure a lot of skin diseases such as the disease known as “Sehua” otherwise known as “Tinea versicolor” or “Pityriasis versicolor” in medical terminology. In this disease lighter or darker patches on skin appears. Apamarga Alkali is very useful for removing these skin patches.

Procedure to prepare “Apamarga” Alkali:

Burn leaves, seeds, stem together in deep pan until ash is formed. Then pour some water and mixed well and removing plant residues filter it with cotton cloth and boil again until water evaporates and after complete evaporation the remaining greasy substance at the bottom is “Apamarga Alkali”

Contact of Lomesh Kumar Buch is: 9753705914

http://swaranetwork.org/swasthya/?cat=90

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About Swami Devaishta

I am a osho sanyasi, yoga teacher and a homoeopath.
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