SUICIDE

suicide

osho view on suicide :

“There is a deep desire in everyone to commit suicide for the simple reason, that life seems to be meaningless. People go on living, not because they love life, they go on living just because they are afraid to commit suicide. There is a desire to; and in many ways they do commit suicide. Monks and nuns have committed psychological suicide, they have renounced life. And these suicidal people have dominated humanity for centuries. They have condemned everything that is beautiful. They have praised something imaginary and they have condemned the real; the real is mundane and the imaginary is sacred. My whole effort here is to help you see that the real is sacred, that this very world is sacred, that this very life is divine. But the way to see it is first to enquire within. Unless you start feeling the source of light within yourself, you will not be able to see that light anywhere else. First it has to be experienced within one’s own being, then it is found everywhere. Then the whole existence becomes so full of light, so full of joy, so full of meaning and poetry, that each moment one feels grateful for all that god has given, for all that he goes on giving. Sannyas is simply a decision to turn in, to look in. The most primary thing is to find your own center. Once it is found, once you are centered, once you are bathed in your own light you have a different vision, a different perspective, and the whole of life becomes golden. Then even dust is divine. Then life is so rich, so abundantly rich that one can only feel a tremendous gratitude towards existence. That gratitude becomes prayer. Before that, all prayer is false.”


osho black (2)
~Osho~

Advertisements

About Swami Devaishta

I am a osho sanyasi, yoga teacher and a homoeopath.
This entry was posted in Articles on Health, Articles on Meditations, ओशो, मानसिक तनाव, स्वास्थ, depression, suicide and tagged , , . Bookmark the permalink.

One Response to SUICIDE

  1. व्यक्ति : मैं आत्महत्या करना चाहता हूँ .

    Osho: तो पहले संन्यास ले लो . और तुम्हे आत्महत्या करने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी , क्योंकि संन्यास लेने से बढ़ कर कोई आत्महत्या नही है . और किसी को आत्महत्या क्यों करनी चाहिए ? मौत तो खुद बखुद आ रही है —तुम इतनी जल्दबाजी में क्यों हो ? मौत आएगी , वो हमेशा आती है . तुम्हारे ना चाहते हुए भी वो आती है . तुम्हे उसे जाकर मिलने की ज़रुरत नहीं है , वो अपने आप आ जाती है .पर तुम अपने जीवन को बुरी तरह से miss करोगे . तुम क्रोध , या चिंता की वजह से suicide करना चाहते हो . मैं तुम्हे real suicide सिखाऊंगा . एक सन्यासी बन जाओ .और ordinary suicide करने से कुछ ख़ास नहीं होने वाला है . , आप तुरंत ही किसी और कोख में कहीं और पैदा हो जाओगे . कुछ बेवकूफ लोग कहीं प्यार कर रहे होंगे , याद रखो ..तुम फिर फंस जाओगे .. तुम इतनी आसानी से नहीं निकल सकते —बौहुत सारे बेवकूफ हैं . इस शरीर से निकलने से पहले तुम किसी और जाल में फंस जाओगे . और एक बार फिर तुम्हे school., college , university जाना पड़ेगा – जरा उसके बारे में सोचो . उन सभी कष्ट भरे अनुभवों के बारे में सोचो — वो तुम्हे sucide करने से रोकेगा .

    तुम जानते हो , Indians इतनी आसानी से suicide नहीं करते , क्योंकि वो जानते हैं कि वो फिर पैदा हो जायेंगे , West में suicide और suicidal ideas exist करते हैं ; बहुत लोग suicide करते हैं , और psychoanalyst कहते हैं कि बहुत कम लोग होते हैं जो ऐसा करने का नहीं सोचते हैं . दरअसल एक आदमी ने investigate कर के कुछ data इकठ्ठा किया था , और उसका कहना है कि – हर एक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम 4 बार suicide करने को सोचता है . पर ये West की बात है , East में , चूँकि लोग पुनर्जन्म के बारे में जानते हैं इसलिए कोई suicide नहीं करना चाहता है – फायदा क्या है ? तुम एक दरवाज़े से निकलते हो और किसी और दरवाजे से फिर अन्दर आ जाते हो . तुम इतनी आसानी से नहीं जा सकते .

    मैं तुम्हे असली आत्महत्या करना सिखाऊंगा , तुम हमेशा के लिए जा सकते हो . इसी का मतलब है बुद्ध बनना – हमेशा के लिए चले जाना .

    तुम suicide क्यों करना चाहते हो ? शायद तुम जैसा चाहते थे life वैसी नहीं चल रही है ? पर तुम ज़िन्दगी पर अपना तरीका , अपनी इच्छा थोपने वाले होते कौन हो ? हो सकता है तुम्हारी इच्छाएं पूरी ना हुई हों ? तो खुद को क्यों ख़तम करते हो अपनी इच्छाओं को ख़तम करो .हो सकता है तुम्हारी expectations पूरी ना हुई हों , और तुम frustrated feel कर रहे हो . जब इंसान frustration में होता है तो वो destroy करना चाहता है . और तब केवल दो संभावनाएं होती हैं —या तो किसी और को मारो या खुद को . किसी और को मारना खतरनाक है , इसलिए लोग खुद को मारने का सोचने लगते हैं . लेकिन ये भी तो एक murder है !! तो क्यों ना ज़िन्दगी को ख़तम करने की बजाये उसे बदल दें !!! — ओशो

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s